PM Vishwakarma Yojana 2026 – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई ‘पीएम विश्वकर्मा योजना’ देश के उन पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए एक क्रांतिकारी पहल है जो अपने हाथों और औजारों से काम करते हैं। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को कुल 3 लाख रुपये तक का कोलेटरल-फ्री (बिना किसी गारंटी के) लोन प्रदान किया जाता है। इस लोन की ब्याज दर मात्र 5% रखी गई है, जो बाजार की दरों से काफी कम है। सरकार का मुख्य उद्देश्य 18 विभिन्न श्रेणियों में आने वाले कारीगरों को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और आर्थिक संबल प्रदान करना है ताकि वे अपने पुश्तैनी काम को एक बड़े व्यवसाय में बदल सकें और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में योगदान दे सकें।
क्या है 3 लाख रुपये वाली पीएम विश्वकर्मा लोन योजना
विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत मिलने वाली 3 लाख रुपये की सहायता राशि को दो चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में सफल प्रशिक्षण के बाद कारीगरों को 1 लाख रुपये का लोन दिया जाता है, जिसे 18 महीने में चुकाना होता है। जब लाभार्थी पहला लोन समय पर चुका देता है, तो वह दूसरे चरण में 2 लाख रुपये के अतिरिक्त लोन के लिए पात्र हो जाता है, जिसे चुकाने के लिए 30 महीने का समय मिलता है। यह योजना उन लोगों के लिए वरदान है जो अपनी छोटी वर्कशॉप खोलना चाहते हैं या नए औजार खरीदना चाहते हैं। खास बात यह है कि इस लोन के लिए आपको अपनी कोई भी संपत्ति या सोना बैंक के पास गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होती है।
इन 18 श्रेणियों के कारीगर उठा सकते हैं लाभ
सरकार ने इस योजना के तहत 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया है। इनमें बढ़ई (सुथार), नाव बनाने वाले, अस्त्र बनाने वाले, लोहार, ताला बनाने वाले, हथौड़ा और टूलकिट निर्माता, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार (पत्थर तराशने वाले), मोची (चर्मकार), राजमिस्त्री, टोकरी/चटाई/झाडू बनाने वाले, गुड़िया और खिलौना निर्माता (पारंपरिक), नाई, माला बनाने वाले, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले शामिल हैं। यदि आप इनमें से किसी भी पेशे से जुड़े हैं, तो आप इस योजना के तहत पंजीकरण कराकर 3 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।
कौशल प्रशिक्षण और 15,000 रुपये का टूलकिट प्रोत्साहन
लोन के अलावा, इस योजना में कौशल विकास पर विशेष जोर दिया गया है। चयनित उम्मीदवारों को 5 से 7 दिनों का बुनियादी प्रशिक्षण (Basic Training) दिया जाता है, और जो कारीगर अपने कौशल को और निखारना चाहते हैं, उन्हें 15 दिन या उससे अधिक का उन्नत प्रशिक्षण (Advanced Training) भी दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थी को हर दिन 500 रुपये का स्टाइपेंड (वजीफा) भी मिलता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, सरकार कारीगरों को आधुनिक टूलकिट खरीदने के लिए 15,000 रुपये का ई-वाउचर या नकद प्रोत्साहन राशि प्रदान करती है। यह सुनिश्चित करता है कि कारीगर के पास न केवल पैसा हो, बल्कि काम करने के लिए बेहतरीन औजार भी हों।
डिजिटल लेनदेन और मार्केटिंग में सरकारी सहायता
आज के डिजिटल युग में कारीगरों को पीछे न रहना पड़े, इसके लिए सरकार डिजिटल लेनदेन पर इनाम भी देती है। हर डिजिटल ट्रांजेक्शन (अधिकतम 100 प्रति माह) पर लाभार्थी को 1 रुपये का कैशबैक मिलता है। इसके अलावा, विश्वकर्मा योजना के तहत पंजीकृत कारीगरों को ‘पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र’ और एक पहचान पत्र दिया जाता है, जो उन्हें एक विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। सरकार इन कारीगरों के उत्पादों की ब्रांडिंग, ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर लिस्टिंग और प्रदर्शनी (Exhibition) के माध्यम से मार्केटिंग में भी मदद करती है ताकि उनके बनाए सामान को देशभर में अच्छे दाम मिल सकें।
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आवेदन की पात्रता और आवश्यक दस्तावेज
पीएम विश्वकर्मा योजना के लिए आवेदन करने हेतु व्यक्ति की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। परिवार का केवल एक ही सदस्य इस योजना का लाभ ले सकता है (परिवार का अर्थ पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे हैं)। आवेदन के लिए आपके पास आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक पासबुक और राशन कार्ड होना अनिवार्य है। यदि आपके पास राशन कार्ड नहीं है, तो परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड देने होंगे। आप अपने नजदीकी ‘जन सेवा केंद्र’ (CSC) पर जाकर इसके लिए मुफ्त में पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण के बाद ग्राम पंचायत या नगर निकाय स्तर पर सत्यापन होता है, जिसके बाद आपको योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाता है।